बंगाल चुनाव 2026: चुनाव आयोग का बड़ा एक्शन, 13 IAS अधिकारियों का तबादला; चुनावी रण के लिए नए 'सेनापति' तैनात

Edited By: Jay Dubey
Updated At: 18 March 2026 17:30:06

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कोलकाता | 18 मार्च, 2026

पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 की आहट के साथ ही राज्य का सियासी पारा सातवें आसमान पर है। एक तरफ राजनीतिक दल अपनी रैलियों और घोषणापत्रों से जनता को लुभाने में जुटे हैं, तो दूसरी तरफ भारत निर्वाचन आयोग (ECI) राज्य में 'फ्री एंड फेयर' यानी निष्पक्ष और पारदर्शी चुनाव सुनिश्चित करने के लिए कमर कस चुका है। इसी कड़ी में बुधवार को आयोग ने एक बड़ा प्रशासनिक फेरबदल करते हुए 13 वरिष्ठ IAS अधिकारियों का तबादला कर दिया है।

इन तबादलों के जरिए आयोग ने संवेदनशील जिलों में नए जिलाधिकारियों (DM) की नियुक्ति की है, जिन्हें जिला चुनाव अधिकारी (DEO) की भी जिम्मेदारी सौंपी गई है।

किन जिलों में हुई नई तैनाती? (पूरी लिस्ट)

चुनाव आयोग द्वारा जारी आदेश के अनुसार, ये नियुक्तियां तत्काल प्रभाव से लागू की गई हैं। आयोग ने स्पष्ट किया है कि जिन अधिकारियों को हटाया गया है, उन्हें चुनाव प्रक्रिया पूरी होने तक किसी भी चुनावी ड्यूटी में नहीं लगाया जाएगा।

प्रमुख जिलों के नए DM-cum-DEO:

जिलाअधिकारी का नाम
कूचबिहारजितिन यादव
जलपाईगुड़ीसंदीप घोष
उत्तर दिनाजपुरविवेक कुमार
मालदाराजवीर सिंह कपूर
मुर्शिदाबादआर. अर्जुन
नदियाश्रीकांत पल्ली
पूर्व बर्धमानश्वेता अग्रवाल
उत्तर 24 परगनाशिल्पा गोरिसारिया
दक्षिण 24 परगनाअभिषेक कुमार तिवारी
दार्जिलिंगहरिशंकर पणिक्कर
अलीपुरद्वारटी. बालसुब्रमण्यम

इसके अलावा, स्मिता पांडेय को कोलकाता नगर निगम का म्युनिसिपल कमिश्नर और कोलकाता उत्तर का DEO बनाया गया है, जबकि रणधीर कुमार कोलकाता दक्षिण के DEO के रूप में जिम्मेदारी संभालेंगे।

क्यों जरूरी था यह फेरबदल?

पश्चिम बंगाल का चुनावी इतिहास अक्सर हिंसा और धांधली के आरोपों से घिरा रहा है। ऐसे में ECI Reshuffle in West Bengal का मुख्य उद्देश्य जमीनी स्तर पर प्रशासन को पूरी तरह न्यूट्रल (निष्पक्ष) बनाना है।

आयोग के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया, "ये अधिकारी न केवल चुनाव संपन्न कराएंगे, बल्कि जिला स्तर पर चुनावी तैयारियों की निगरानी के लिए ऑब्जर्वर (पर्यवेक्षक) के रूप में भी कार्य करेंगे। हमारा लक्ष्य हर मतदाता को बिना किसी डर के वोट डालने का सुरक्षित माहौल देना है।"

ममता सरकार और आयोग के बीच ठनी

निर्वाचन आयोग के इस 'ट्रांसफर स्प्री' (तबादलों की झड़ी) पर राज्य की सत्ताधारी पार्टी तृणमूल कांग्रेस (TMC) ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने केंद्र सरकार और चुनाव आयोग पर निशाना साधते हुए कहा है कि आयोग को अधिकारियों के तबादले करने के बजाय सीधे 'भाजपा के लिए प्रचार' शुरू कर देना चाहिए।

इससे पहले सोमवार और मंगलवार को भी आयोग ने राज्य के मुख्य सचिव, डीजीपी और 19 वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों का तबादला किया था। टीएमसी इसे राज्य के आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप और संघीय ढांचे पर हमला बता रही है।

2026 चुनाव का पूरा गणित

आपको बता दें कि पश्चिम बंगाल की 294 विधानसभा सीटों के लिए वोटिंग दो चरणों (23 अप्रैल और 29 अप्रैल) में होनी है।

  • पहला चरण: 152 सीटें (23 अप्रैल)
  • दूसरा चरण: 142 सीटें (29 अप्रैल)
  • नतीजे: 4 मई, 2026

चुनाव आयोग ने इस बार सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए हैं। पूरे राज्य में 1,111 ऑब्जर्वर्स तैनात किए गए हैं, जिनमें से सबसे ज्यादा संख्या बंगाल के लिए ही आरक्षित रखी गई है। हर निर्वाचन क्षेत्र के लिए एक जनरल ऑब्जर्वर, साथ ही भारी संख्या में पुलिस और व्यय (Expenditure) ऑब्जर्वर्स की नियुक्ति की गई है।

निष्कर्ष: क्या बदलेगी तस्वीर?

प्रशासनिक स्तर पर इतने बड़े बदलावों के बाद अब गेंद जनता के पाले में है। क्या ये नए जिलाधिकारी और पुलिस कप्तान राज्य में शांतिपूर्ण मतदान सुनिश्चित कर पाएंगे? यह तो आने वाला वक्त ही बताएगा, लेकिन चुनाव आयोग के तेवरों से साफ है कि वह इस बार किसी भी तरह की कोताही बरतने के मूड में नहीं है।

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