बिहार में सियासी 'खेला' अभी बाकी है: चिराग पासवान का बड़ा दावा, क्या राज्यसभा चुनाव के बाद सच में टूट जाएगी आरजेडी?

Edited By: Jay Dubey
Updated At: 19 March 2026 06:43:52

पटना डेस्क | टाइम्स भारत न्यूज़ तारीख: 19 मार्च, 2026

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"बिहार की राजनीति और मौसम का भरोसा नहीं, कब करवट बदल ले कोई नहीं जानता।" पटना की गलियों में यह कहावत आज एक बार फिर चरितार्थ होती दिख रही है। अभी राज्यसभा चुनाव की स्याही सूखी भी नहीं थी कि बिहार की राजनीति के 'युवा तुर्क' और केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान ने एक ऐसा बयान दे दिया है, जिसने राबड़ी आवास से लेकर तेजस्वी यादव के रणनीतिकारों तक की नींद उड़ा दी है।

चिराग पासवान ने दावा किया है कि राज्यसभा चुनाव के नतीजों के बाद राष्ट्रीय जनता दल (RJD) के अंदर भारी असंतोष है और यह पार्टी किसी भी वक्त बिखर सकती है। लेकिन सवाल यह है कि क्या यह सिर्फ एक राजनीतिक बयानबाजी है या वाकई पर्दे के पीछे कोई बड़ी पटकथा लिखी जा रही है?

चिराग का 'विस्फोटक' दावा: आखिर आधार क्या है?

पटना में मीडिया से मुखातिब होते हुए चिराग पासवान ने बड़े ही आत्मविश्वास के साथ कहा, "आरजेडी में जो भगदड़ मचने वाली है, उसकी पटकथा राज्यसभा चुनाव के दौरान ही लिख दी गई थी। कई विधायक अपने नेतृत्व के फैसलों से खुश नहीं हैं और वे बहुत जल्द सही समय का इंतजार कर रहे हैं।"

चिराग का यह इशारा तेजस्वी यादव की उन कोशिशों की ओर था, जहाँ राज्यसभा सीटों के बंटवारे को लेकर पार्टी के भीतर कुछ पुराने दिग्गजों में नाराजगी की खबरें आई थीं। चिराग का मानना है कि एनडीए की मजबूती को देखते हुए आरजेडी के कई विधायक अपना भविष्य अब लालटेन की रोशनी में नहीं, बल्कि कमल और तीर के साथ देख रहे हैं।

राज्यसभा चुनाव: हार के बाद की हताशा या रणनीतिक चूक?

हालिया राज्यसभा चुनावों के परिणामों ने एनडीए को मनोवैज्ञानिक बढ़त दी है। चिराग पासवान का तर्क है कि जब कोई बड़ी पार्टी चुनाव हारती है या उसके अपने लोग पाला बदलने लगते हैं, तो वह पतन की शुरुआत होती है।

पिछली यादें: याद कीजिए 2024 के लोकसभा चुनाव के बाद की वह स्थिति, जब विपक्ष ने दावा किया था कि एनडीए टूटने वाला है। आज चिराग वही दांव तेजस्वी पर चल रहे हैं। राजनीति में यह 'परसेप्शन' यानी धारणा का खेल बहुत पुराना है। चिराग जानते हैं कि अगर वे यह संदेश देने में कामयाब रहे कि आरजेडी टूट रही है, तो कशमकश में फंसे विधायक वाकई पाला बदल सकते हैं।

तेजस्वी यादव के सामने 'अस्तित्व' की चुनौती

तेजस्वी यादव, जो वर्तमान में बिहार के सबसे लोकप्रिय युवा नेताओं में से एक माने जाते हैं, उनके लिए यह समय अग्निपरीक्षा जैसा है। एक तरफ नीतीश कुमार का पलटी मारना और दूसरी तरफ चिराग पासवान जैसे आक्रामक नेताओं का सीधा हमला।

  • भीतरघात का डर: क्या वाकई तेजस्वी के कुनबे में सब कुछ ठीक है? राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि सीमांचल और मगध क्षेत्र के कुछ आरजेडी विधायक एनडीए के संपर्क में हैं।
  • चिराग की रणनीति: चिराग पासवान अब केवल अपनी पार्टी (LJP-R) को नहीं संभाल रहे, बल्कि वे एनडीए के 'संकटमोचक' और 'आक्रामक चेहरे' के रूप में उभर रहे हैं। उनका यह हमला तेजस्वी को रक्षात्मक मोड में लाने की एक सोची-समझी कोशिश है।

क्या वाकई टूट जाएगी आरजेडी?

बिहार के राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि आरजेडी जैसी कैडर आधारित पार्टी को तोड़ना इतना आसान नहीं है। लालू प्रसाद यादव का अपना एक मजबूत जनाधार है। लेकिन, सत्ता से बाहर होने के बाद विधायकों को एकजुट रखना किसी भी पार्टी के लिए चुनौतीपूर्ण होता है।

पुरानी मिसालें: हमने देखा है कि कैसे एक समय में जेडीयू में बड़ी टूट हुई थी, और कैसे खुद चिराग की पार्टी को उनके चाचा पशुपति पारस ने दो फाड़ कर दिया था। राजनीति में 'जो जैसा बोता है, वैसा काटता है' का सिद्धांत बहुत चलता है। चिराग शायद वही दर्द अब आरजेडी को देने की कोशिश में हैं जो उन्होंने खुद झेला था।

जनता की अदालत और टाइम्स भारत का नजरिया

बिहार की राजनीति अब उस मोड़ पर है जहाँ हर कदम पर एक नया सस्पेंस है। चिराग का दावा अगर सच साबित होता है, तो 2025 के विधानसभा चुनाव से पहले बिहार का नक्शा ही बदल जाएगा। और अगर यह सिर्फ एक 'माइंड गेम' है, तो तेजस्वी यादव को अपनी जड़ों को और मजबूत करना होगा।

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  2. क्या तेजस्वी यादव अपने विधायकों को एनडीए की 'जादुई पकड़' से बचा पाएंगे?
  3. बिहार की राजनीति में आपका पसंदीदा युवा नेता कौन है—चिराग पासवान या तेजस्वी यादव?

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