: रेलवे का मास्टरस्ट्रोक: सहरसा-फारबिसगंज-जोगबनी रूट पर दौड़ेगी 'डबल' रफ्तार, नेपाल से व्यापार और सफर होगा आसान

Edited By: Jay Dubey
Updated At: 22 February 2026 19:30:34

: सीमांचल-कोसी का महामिलन: ₹1799 करोड़ के कटिहार-जोगबनी रेल दोहरीकरण को हरी झंडी, अररिया-फारबिसगंज बनेंगे बड़े ट्रेड हब

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सहरसा-फारबिसगंज-जोगबनी: कोसी और सीमांचल के मिलन से खुलेगा 'ईस्टर्न गेटवे'

फारबिसगंज/सहरसा: कटिहार-जोगबनी रेल लाइन के दोहरीकरण (Doubling) की मंजूरी केवल एक ट्रैक का विस्तार नहीं है, बल्कि यह सहरसा-फारबिसगंज-पूर्णिया-कटिहार के उस 'गोल्डन ट्रायंगल' को जोड़ने की चाबी है, जिसका इंतजार दशकों से किया जा रहा था। इस जुड़ाव से अब सहरसा से जोगबनी और कटिहार की दूरी न केवल कम होगी, बल्कि ट्रेनों का परिचालन "सुपरफास्ट" श्रेणी में आ जाएगा।

कनेक्टिविटी का नया समीकरण: क्यों है यह ऐतिहासिक?

1. कोसी और सीमांचल का सीधा 'शॉर्टकट' सहरसा-फारबिसगंज रेल खंड के अमान परिवर्तन (Gauge Conversion) के बाद अब इस रूट पर ट्रेनों का परिचालन शुरू हो चुका है। कटिहार-जोगबनी लाइन के डबल होने से सहरसा और सुपौल के यात्रियों के लिए जोगबनी (नेपाल बॉर्डर) और कटिहार पहुंचना बेहद आसान हो जाएगा।

  • फायदा: अब ट्रेनों को फारबिसगंज या कटिहार में क्रॉसिंग के लिए घंटों खड़ा नहीं होना पड़ेगा।

2. फारबिसगंज बनेगा 'रणनीतिक जंक्शन' फारबिसगंज अब एक साधारण स्टेशन नहीं, बल्कि एक मेजर जंक्शन के रूप में उभरेगा।

  • एक तरफ से यह सहरसा-ललितग्राम-नरपतगंज को जोड़ता है।
  • दूसरी तरफ से यह कटिहार-पूर्णिया-अररिया को जोड़ता है।
  • तीसरी तरफ यह सीधे जोगबनी (नेपाल सीमा) तक जाता है। इन तीनों दिशाओं से आने वाली ट्रेनों के लिए फारबिसगंज एक 'कंट्रोल टावर' की भूमिका निभाएगा।

3. मिथिलांचल से सीमांचल तक 'सुपरफास्ट' सफर इस दोहरीकरण के बाद दरभंगा और सहरसा से आने वाली लंबी दूरी की ट्रेनें सीधे फारबिसगंज होते हुए कटिहार और फिर वहां से कोलकाता या गुवाहाटी जा सकेंगी। इससे बरौनी और मानसी के रूट पर पड़ने वाला भारी दबाव कम होगा।

व्यापारिक और सामरिक महत्व

  • नेपाल के लिए दूसरा प्रवेश द्वार: सहरसा और सुपौल के व्यापारियों के लिए अब जोगबनी के रास्ते नेपाल व्यापार करना पहले के मुकाबले 50% अधिक सस्ता और तेज हो जाएगा।
  • सेना के लिए महत्वपूर्ण: सामरिक दृष्टि से यह रूट सिलीगुड़ी कॉरिडोर (चिकन नेक) के समानांतर एक वैकल्पिक मार्ग तैयार करता है, जो आपात स्थिति में सेना की आवाजाही के लिए संजीवनी साबित होगा।

अमृत भारत स्टेशन योजना का तड़का

परियोजना के तहत फारबिसगंज और अररिया स्टेशनों को 'अमृत भारत स्टेशन' योजना के तहत विश्वस्तरीय बनाया जा रहा है। डबल ट्रैक होने के बाद यहाँ प्लेटफॉर्म्स की संख्या बढ़ाई जाएगी और अत्याधुनिक वाशिंग पिट (Washing Pit) की सुविधा मिलने की भी संभावना है, जिससे यहाँ से नई ट्रेनें खुल सकेंगी।

टाइम्स भारत एनालिसिस: सहरसा से जोगबनी तक का यह रेल जाल बिहार के पिछड़ेपन को दूर कर उसे 'लॉजिस्टिक्स हब' बनाने की दिशा में सबसे बड़ा कदम है।

 

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