जीने-मरने की कसम' हुई सच: पत्नी की मौत के ठीक 1 घंटे बाद पति ने भी त्यागे प्राण, अररिया में शोक
ररिया: एक ही चिता पर पंचतत्व में विलीन हुआ बुजुर्ग जोड़ा, प्रेम की मिसाल
अररिया: 7 जन्मों का साथ, 1 घंटे का अंतराल; पोते की शादी के बाद एक साथ विदा हुए दादा-दादी
अररिया (टाइम्स भारत न्यूज डेस्क): बिहार के अररिया जिले से एक ऐसी खबर सामने आई है जिसने पूरे इलाके के लोगों की आँखों में आँसू ला दिए हैं। कहते हैं कि जोड़ियाँ ऊपर वाला बनाता है, लेकिन अररिया के इस बुजुर्ग दंपति ने 'जीने-मरने' की उस कसम को सच कर दिखाया जो उन्होंने दशकों पहले अग्नि के सामने ली थी। फारबिसगंज के हलहलिया गांव में एक बुजुर्ग दंपति की एक ही घंटे के भीतर मौत हो गई, जिससे पूरा गांव शोक में डूबा है।
शादी की खुशियों के बीच पसरा मातम
मिली जानकारी के अनुसार, हलहलिया पंचायत के वार्ड संख्या 5 निवासी 100 वर्षीय सुकदेव ठाकुर उर्फ मुनी जी और उनकी 98 वर्षीय पत्नी राधा देवी के घर में गुरुवार को खुशियों का माहौल था। उनके पोते राजकुमार की शादी संपन्न हुई थी। बारात लौटने के बाद इस बुजुर्ग दंपति ने नवविवाहित जोड़े को अपना आशीर्वाद दिया। पोते और बहू के गृह प्रवेश की रस्मों के बाद सब कुछ सामान्य था, लेकिन नियति को कुछ और ही मंजूर था।
पत्नी की मौत के सदमे में पति ने भी त्यागे प्राण
परिजनों ने बताया कि गुरुवार रात करीब 10 से 11 बजे के बीच सबसे पहले राधा देवी (98) का निधन हुआ। अभी घर के लोग इस दुख से उबर भी नहीं पाए थे कि अपनी जीवनसंगिनी के जाने की खबर सुनते ही सुकदेव ठाकुर (100) ने भी महज एक घंटे के भीतर अंतिम सांस ली। ग्रामीणों का कहना है कि दोनों के बीच अटूट प्रेम था और शायद यही वजह थी कि सुकदेव जी अपनी पत्नी के बिना एक पल भी नहीं रह सके।
एक साथ उठी दोनों की अर्थी
शुक्रवार को जब गांव में दोनों की अर्थी एक साथ निकली, तो हर किसी की आँख नम थी। पूरे विधि-विधान के साथ दोनों का अंतिम संस्कार किया गया। उनके बड़े पुत्र ने माता-पिता दोनों को एक साथ मुखाग्नि दी। स्थानीय लोगों के लिए यह घटना किसी चमत्कार या ईश्वरीय संकेत से कम नहीं है।
मृतक दंपति अपने पीछे तीन बेटों और तीन बेटियों समेत नाती-पोतों का भरा-पूरा परिवार छोड़ गए हैं। गांव के मुखिया और अन्य गणमान्य व्यक्तियों ने इस दुख की घड़ी में परिवार को ढांढस बंधाया।
ब्यूरो रिपोर्ट: टाइम्स भारत न्यूज, बिहार
मुन्ना ठाकुर फारबिसगंज