World Homeopathy Day 2026: फारबिसगंज में गूंजा डॉ. हैनिमैन का नाम, चिकित्सकों ने चिकित्सा क्रांति के जनक को किया नमन।

Edited By: Hemant yadav
Updated At: 10 April 2026 22:23:14

होम्योपैथी: पुराने रोगों का काल! डॉ. हैनिमैन की जयंती पर फारबिसगंज के चिकित्सकों का बड़ा संदेश।

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विश्व होम्योपैथी दिवस: फारबिसगंज में श्रद्धापूर्वक मनाई गई चिकित्सा क्रांति के जनक डॉ. हैनिमैन की जयंती

संवाददाता: टाइम्स भारत न्यूज़ डेस्क स्थान: फारबिसगंज (अररिया) तारीख: 10 अप्रैल, 2026

मुख्य समाचार: 'जड़ से खत्म होते हैं रोग, नहीं होता दुष्प्रभाव'—चिकित्सकों ने दी डॉ. हैनिमैन को श्रद्धांजलि

फारबिसगंज। आधुनिक चिकित्सा पद्धति में 'सिमिलिया सिमिलिबस क्यूरेंटुर' (सदृश से सदृश की चिकित्सा) का सिद्धांत देने वाले महान चिकित्सक महात्मा सैमुअल हैनिमैन की जयंती शुक्रवार को स्थानीय बगीचा चौक स्थित डॉ. डी.एल. दास 'दिव्यांशु' के आवास पर समारोहपूर्वक मनाई गई। डॉ. अजय कुमार सिंह की अध्यक्षता में आयोजित इस कार्यक्रम को 'विश्व होम्योपैथी दिवस' के रूप में हर्षोल्लास के साथ मनाया गया।

श्रद्धांजलि और दीप प्रज्वलन

कार्यक्रम का शुभारंभ उपस्थित चिकित्सकों और गणमान्य अतिथियों द्वारा डॉ. हैनिमैन के तैल चित्र पर दीप प्रज्वलित कर और पुष्प अर्पित कर किया गया। इस दौरान वातावरण हैनिमैन के प्रति श्रद्धा और सम्मान से ओत-प्रोत नजर आया।

चिकित्सा क्षेत्र में हैनिमैन का अवदान

समारोह को संबोधित करते हुए वक्ताओं ने डॉ. हैनिमैन की जीवनी पर विस्तार से प्रकाश डाला। डॉ. रामनारायण दास, डॉ. राजकुमार और डॉ. श्वेता कुमारी ने बताया कि:

  • जन्म और पृष्ठभूमि: डॉ. हैनिमैन का जन्म 10 अप्रैल 1755 को जर्मनी के सक्सोनी में हुआ था।
  • एलोपैथी से होम्योपैथी का सफर: वह मूलतः एक कुशल एलोपैथी चिकित्सक थे, लेकिन तत्कालीन चिकित्सा पद्धतियों की कमियों और दुष्प्रभावों को देख उनकी रुचि नई खोज की ओर बढ़ी।
  • स्वयं पर परीक्षण: उन्होंने जड़ी-बूटियों से बनी होम्योपैथिक दवाओं का सबसे पहला परीक्षण स्वयं पर किया, जो उनकी वैज्ञानिक निष्ठा का प्रमाण है।

होम्योपैथी की विशेषता: जड़ से इलाज

वरिष्ठ चिकित्सक डॉ. डी.एल. दास और डॉ. मुरली कुमार मंडल ने जोर देकर कहा कि होम्योपैथी पुराने से पुराने असाध्य रोगों को जड़ से खत्म करने में सक्षम है। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि इन दवाओं का रोगी के शरीर पर कोई विपरीत दुष्प्रभाव (Side Effect) नहीं पड़ता है, जो इसे जनमानस के लिए सुरक्षित और सुलभ बनाता है।

साहित्य और जागरूकता का संगम

विशेष रूप से आमंत्रित वरिष्ठ साहित्यकार हेमंत यादव ने अपने संबोधन में आयुष मंत्रालय, भारत सरकार की भूमिका की सराहना की। उन्होंने कहा कि आज के दिन देशभर में आयोजित होने वाले सेमिनार होम्योपैथी के प्रति जागरूकता फैलाने में मील का पत्थर साबित हो रहे हैं। कार्यक्रम का सफल संचालन प्रोफेसर साबिर इदरीश ने किया।

उपस्थिति

इस अवसर पर डॉ. पूजा कुमारी, डॉ. रानी जायसवाल, डॉ. दिलीप दास, डॉ. श्रीकांत विश्वास, डॉ. शुभंकर तिवारी, डॉ. सुकुमार तिवारी, दीपक कुमार मंडल और सरिता देवी सहित अनेक स्वास्थ्यकर्मी और होम्योपैथी प्रेमी उपस्थित थे।

टाइम्स भारत न्यूज़ विशेष (Expert Byte):

डॉ. हैनिमैन ने केवल एक चिकित्सा पद्धति की खोज नहीं की, बल्कि उन्होंने 'होलीस्टिक हीलिंग' यानी संपूर्ण स्वास्थ्य का मार्ग प्रशस्त किया। आज के दौर में जब लाइफस्टाइल बीमारियां बढ़ रही हैं, होम्योपैथी एक वरदान बनकर उभरी है।

Written by-hemant yadav
M.A phd
Poet and writer

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