सुलगता मिडिल ईस्ट और वतन वापसी की आस: पीएम मोदी का भरोसा, 'संकट में साथ खड़ा है नया भारत'

Edited By: Jay Dubey
Updated At: 12 March 2026 07:54:38

"जब आसमान से मिसाइलें बरस रही हों और जमीन पर बारूद की गंध हो, तब अपनों से दूर किसी दूसरे देश में फंसे इंसान के लिए 'घर' सिर्फ एक शब्द नहीं, एक सपना बन जाता है।"

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सुलगता मिडिल ईस्ट और वतन वापसी की आस: पीएम मोदी का भरोसा, 'संकट में साथ खड़ा है नया भारत'


विशेष विश्लेषण: टाइम्स भारत न्यूज़ डेस्क
तारीख: 11 मार्च, 2026


"जब आसमान से मिसाइलें बरस रही हों और जमीन पर बारूद की गंध हो, तब अपनों से दूर किसी दूसरे देश में फंसे इंसान के लिए 'घर' सिर्फ एक शब्द नहीं, एक सपना बन जाता है।"


ईरान और इजरायल के बीच छिड़ी इस जंग ने मिडिल ईस्ट (पश्चिम एशिया) को एक ऐसे मुहाने पर खड़ा कर दिया है, जहाँ शांति की उम्मीदें धुंधली पड़ती जा रही हैं। इस युद्ध की तपिश ने वहां रह रहे करीब 90 लाख से ज्यादा भारतीयों के मन में डर और अनिश्चितता भर दी है। लेकिन इस संकट के बीच, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के हालिया बयान ने उन लाखों परिवारों को बड़ी राहत दी है जो अपने सदस्यों की सलामती के लिए दिन-रात प्रार्थना कर रहे हैं।
"नया भारत अपने लोगों को मुसीबत में नहीं छोड़ता" – पीएम मोदी


केरल के कोच्चि और एर्नाकुलम में चुनावी रैलियों के दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने मिडिल ईस्ट के ताजा हालात पर देश को संबोधित किया। उन्होंने साफ लफ्जों में कहा, "यह आज का नया भारत है, जो अपने नागरिकों को दुनिया के किसी भी कोने में लावारिस नहीं छोड़ता। हम खाड़ी देशों की स्थिति पर चौबीसों घंटे नजर बनाए हुए हैं और वहां फंसे हर भारतीय तक मदद पहुंचाने के लिए प्रतिबद्ध हैं।"


पीएम मोदी का यह भरोसा केवल शब्दों तक सीमित नहीं रहा। विदेश मंत्रालय (MEA) ने तुरंत एक्शन लेते हुए 24x7 हेल्पलाइन और स्पेशल कंट्रोल रूम स्थापित कर दिए हैं। यह संदेश स्पष्ट है: चाहे वह 'ऑपरेशन गंगा' हो या 'वंदे भारत', भारत सरकार अपने लोगों को सुरक्षित निकालने के लिए अपनी पूरी ताकत लगा देगी।
खाड़ी देशों का वर्तमान मंजर: डर और कंक्रीट का सन्नाटा
28 फरवरी, 2026 को ईरान पर हुए हमलों के बाद से खाड़ी देशों (UAE, कतर, ओमान, सऊदी अरब) में माहौल पूरी तरह बदल गया है।
* दुबई और अबू धाबी: जो शहर कभी अपनी चकाचौंध के लिए जाने जाते थे, वहां अब सायरन की आवाजें और एयर-डिफेंस सिस्टम की गड़गड़ाहट आम हो गई है। हाल ही में दुबई एयरपोर्ट के पास हुए ड्रोन हमलों ने सुरक्षा चिंताओं को चरम पर पहुंचा दिया है।
* सैनिकों की तैनाती: ओमान और सऊदी अरब जैसे देशों ने अपनी सीमाओं पर सुरक्षा बढ़ा दी है। आम नागरिकों को बंकरों के करीब रहने और आपातकालीन किट तैयार रखने की सलाह दी गई है।


उड़ानों का संकट: कैंसिल होती टिकटें और बढ़ता इंतजार
युद्ध की वजह से मिडिल ईस्ट का हवाई क्षेत्र (Airspace) एक बड़ी चुनौती बन गया है।
* भारी कैंसिलेशन: इंडिगो, एयर इंडिया और एयर इंडिया एक्सप्रेस जैसी कंपनियों को मार्च के पहले हफ्ते में ही सैकड़ों उड़ानें रद्द करनी पड़ीं। अकेले 6 मार्च को इंडिगो ने 112 अंतरराष्ट्रीय उड़ानें रद्द की थीं।
* स्पेशल फ्लाइट्स की शुरुआत: राहत की बात यह है कि 9 मार्च से भारत सरकार के दखल के बाद कुछ विशेष 'रेस्क्यू' उड़ानें शुरू की गई हैं। एयर इंडिया और एयर इंडिया एक्सप्रेस ने दुबई, मुंबई और दिल्ली के बीच करीब 32 अतिरिक्त उड़ानें संचालित की हैं ताकि फंसे हुए यात्रियों को लाया जा सके।
* बढ़ता किराया: जो उड़ानें चल भी रही हैं, उनका किराया सामान्य से 3 से 4 गुना तक बढ़ गया है, जिससे मध्यम वर्गीय कामगारों के लिए वापसी का सफर आर्थिक रूप से बोझिल हो गया है।


युद्ध के बीच स्वास्थ्य की मार: सिर्फ घाव नहीं, मानसिक तनाव भी
युद्ध केवल गोलियों से नहीं मारता, वह स्वास्थ्य व्यवस्थाओं को भी ध्वस्त कर देता है। मिडिल ईस्ट में रह रहे भारतीयों के सामने अब स्वास्थ्य संबंधी गंभीर चुनौतियां खड़ी हैं:
* अस्पतालों पर दबाव: घायलों की बढ़ती संख्या की वजह से सामान्य बीमारियों (जैसे डायलिसिस, कैंसर ट्रीटमेंट) के मरीजों को इलाज मिलने में दिक्कत हो रही है।
* दवाइयों की किल्लत: स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज में सप्लाई लाइन बाधित होने से जरूरी दवाइयों और इंसुलिन जैसी जीवन रक्षक दवाओं की कमी होने लगी है।
* मेंटल हेल्थ: वहां रह रहे बच्चों और बुजुर्गों में 'वॉर ट्रॉमा' (War Trauma) के लक्षण देखे जा रहे हैं। धमाकों की आवाजों और अनिश्चित भविष्य ने लोगों की नींद छीन ली है।
वतन वापसी की तड़प: "बस एक बार घर पहुंच जाऊं"


टाइम्स भारत न्यूज़ ने खाड़ी में फंसे कई भारतीयों से बात की। मल्लपुरम के रहने वाले राजेश, जो दुबई में एक कंस्ट्रक्शन कंपनी में काम करते हैं, बताते हैं— "यहाँ बिल्डिंगों के ऊपर से गुजरती मिसाइलें देखकर रूह कांप जाती है। काम बंद है, खाने-पीने का सामान महंगा हो रहा है। हम बस यह चाहते हैं कि किसी तरह सरकार हमें भारत पहुंचा दे, विदेश मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, 1 मार्च से 7 मार्च 2026 के बीच ही 52,000 से ज्यादा भारतीय सुरक्षित स्वदेश लौट चुके हैं। इनमें से 32,000 से ज्यादा लोगों ने भारतीय विमान सेवा का उपयोग किया। यह संख्या दिखाती है कि पलायन की इच्छा कितनी तीव्र है। कई लोग अपनी जमा-पूंजी छोड़कर सिर्फ जान बचाने के लिए वापस आना चाहते हैं।

मिडिल ईस्ट का यह संघर्ष न केवल एक कूटनीतिक चुनौती है, बल्कि एक मानवीय संकट भी है। प्रधानमंत्री मोदी का आश्वासन उन लोगों के लिए उम्मीद की किरण है जो वहां फंसे हैं। भारत सरकार की सक्रियता और 'मिशन मोड' में हो रही वापसी की प्रक्रिया ने साबित किया है कि संकट की घड़ी में भारत अपने 'प्रवासी दूतों' को कभी अकेला नहीं छोड़ेगा

रिपोर्ट: डिजिटल डेस्क, टाइम्स भारत न्यूज़

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