अररिया लोक अदालत में न्याय का महाकुंभ: 1427 मामलों का ऑन-द-स्पॉट निपटारा, 28 साल पुराने विवाद का हुआ अंत

Edited By: adv rahul ranjan
Updated At: 17 March 2026 17:00:39

सुलह से मिली राहत: अररिया में पहली राष्ट्रीय लोक अदालत सफल, करोड़ों रुपये की हुई बैंक रिकवरी

Advertisement

अररिया: पहली राष्ट्रीय लोक अदालत में न्याय की बड़ी जीत, 28 साल पुराने विवाद का भी हुआ अंत

 

विशेष रिपोर्ट: टाइम्स भारत न्यूज़ डेस्क तारीख: 17 मार्च, 2026

adv rahul ranjan

अररिया: जिला व्यवहार न्यायालय परिसर में शनिवार को वर्ष 2026 की पहली राष्ट्रीय लोक अदालत का भव्य आयोजन किया गया, जिसमें आपसी समझौते के जरिए वर्षों से लंबित मामलों का निपटारा कर हजारों लोगों को बड़ी राहत दी गई। इस लोक अदालत की सबसे बड़ी उपलब्धि 28 वर्ष पुराने एक मामले का समाधान रहा, जिसने न्याय प्रणाली में आम जन के भरोसे को और मजबूत किया है।

दीप प्रज्वलित कर हुआ उद्घाटन

लोक अदालत का उद्घाटन जिला एवं प्रधान सत्र न्यायाधीश गुंजन पांडे ने पक्षकारों के साथ संयुक्त रूप से दीप प्रज्वलित कर किया। इस महत्वपूर्ण अवसर पर अररिया की डीसी रोजी कुमारी और यातायात पुलिस उपाध्यक्ष फकड़े आलम सहित कई वरिष्ठ न्यायिक पदाधिकारी मौजूद रहे। यह आयोजन राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण (NALSA) और बिहार राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण (BSLSA) के निर्देश पर जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, अररिया द्वारा संपन्न किया गया।

16 बेंचों ने निपटाए 1427 मामले

सुलहनीय मामलों के त्वरित और निःशुल्क निपटारे के लिए कुल 16 विशेष बेंचों का गठन किया गया था। इन बेंचों में न्यायिक पदाधिकारियों के साथ पैनल अधिवक्ताओं ने भी अपनी भूमिका निभाई। लोक अदालत के दौरान कुल 1427 मामलों का निपटारा आपसी समझौते के आधार पर किया गया।

निपटाए गए प्रमुख मामलों का विवरण:

  • आपराधिक वाद: 606 मामले
  • बैंक रिकवरी: 655 मामले
  • धारा 107 CRPC/126 BNSS: 108 मामले
  • मोटर व्हीकल चालान: 40 मामले
  • वैवाहिक विवाद (मैट्रीमोनियल): 15 मामले
  • चेक बाउंस (NI एक्ट): 03 मामले

करोड़ों की हुई वसूली

न्यायिक राहत के साथ-साथ इस लोक अदालत में बड़े पैमाने पर वित्तीय निपटारा भी हुआ। जिले के सभी बैंकों ने मिलकर कुल 2 करोड़ 94 लाख 33 हजार 882 रुपये का समझौता किया, जिसके तहत 1 करोड़ 72 लाख 02 हजार 897 रुपये की मौके पर वसूली की गई।

"लोक अदालत में केवल जीत ही जीत होती है"

प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश गुंजन पांडे ने जोर देते हुए कहा कि लोक अदालत एक ऐसा मंच है जहाँ "केवल जीत ही जीत होती है, हार नहीं"। उन्होंने बताया कि यहाँ बिना वकील के भी मामले सुलझ सकते हैं और यह फैसला अंतिम एवं बाध्यकारी होता है। इस आयोजन को सफल बनाने के लिए जागरूकता रथ के माध्यम से ग्रामीण क्षेत्रों में व्यापक प्रचार-प्रसार भी किया गया था।

पैनल अधिवक्ता राहुल रंजन ने बताया कि इस प्रक्रिया से न केवल अदालती खर्च कम होता है, बल्कि आम आदमी को अदालतों की लंबी जटिलताओं से मुक्ति भी मिलती है।

ऐसी ही खबरों के लिए जुड़े रहें टाइम्स भारत न्यूज़ के साथ।

Advertisement