भोजशाला–सरस्वती मंदिर का ऐतिहासिक विवाद

Edited By: Jay Dubey
Updated At: 04 February 2026 23:01:20

इसी परिसर को मुस्लिम समुदाय कमाल मौला मस्जिद के रूप में मानता है,

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भोजशाला–सरस्वती मंदिर का ऐतिहासिक विवाद 

मध्य प्रदेश के धार जिले में स्थित भोजशाला सरस्वती मंदिर को लेकर लंबे समय से ऐतिहासिक और धार्मिक विवाद चला आ रहा है। यह स्थल परंपरागत रूप से देवी सरस्वती के मंदिर और संस्कृत शिक्षा के केंद्र के रूप में जाना जाता है। माना जाता है कि इसका संबंध परमार वंश के प्रसिद्ध शासक राजा भोज से है, जिनके काल में धार ज्ञान और विद्या का बड़ा केंद्र था।

दूसरी ओर, इसी परिसर को मुस्लिम समुदाय कमाल मौला मस्जिद के रूप में मानता है, जहां लंबे समय से नमाज़ अदा की जाती रही है। इतिहासकारों के अनुसार, मध्यकाल में मंदिर संरचना में बदलाव कर मस्जिद का रूप दिया गया, जिससे दोहरी धार्मिक पहचान बनी।

विवाद की एक प्रमुख कड़ी यहां पाए गए शिलालेख हैं, जिनमें संस्कृत भाषा और सरस्वती वंदना का उल्लेख मिलता है। इन्हीं प्रमाणों के आधार पर हिंदू पक्ष इसे प्राचीन सरस्वती मंदिर बताता है, जबकि मुस्लिम पक्ष इसे ऐतिहासिक मस्जिद के रूप में संरक्षित रखने की मांग करता है।

सरकार ने लंबे समय तक संतुलन बनाने के लिए पूजा और नमाज़ के समय अलग-अलग तय किए। इस स्थल का संरक्षण भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण के अधीन है। समय-समय पर अदालतों में भी मामला पहुंचा है, जहां सर्वेक्षण और ऐतिहासिक तथ्यों के आधार पर निर्णय लेने की कोशिश की जाती रही है।

संक्षेप में, भोजशाला विवाद आस्था, इतिहास और पुरातत्व के संगम का विषय है, जहां समाधान की राह संवाद, ऐतिहासिक साक्ष्यों और न्यायिक प्रक्रिया से होकर ही निकल सकती है।

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