रवींद्रनाथ टैगोर जयंती 2026: फारबिसगंज में साहित्यकारों ने दी गुरुदेव को श्रद्धांजलि, राष्ट्रगान से गूंजा परिसर।
विश्व भारती से नोबेल तक: फारबिसगंज में गूंजे गुरुदेव टैगोर के विचार; हेमंत यादव ने की कार्यक्रम की अध्यक्षता।
विशेष रिपोर्ट: "जहाँ मन भयमुक्त हो..."—फारबिसगंज में गूंजा गुरुदेव टैगोर का कालजयी राष्ट्रगान; 165वीं जयंती पर साहित्यकारों ने किया नमन
संवाददाता: टाइम्स भारत न्यूज़ डेस्क स्थान: फारबिसगंज (अररिया) तारीख: 08 मई, 2026
1. इंद्रधनुष साहित्य परिषद ने मनाया 'रवींद्र जयंती' समारोह
स्थानीय प्रोफेसर कॉलोनी स्थित पीडब्ल्यूडी परिसर में शुक्रवार को इंद्रधनुष साहित्य परिषद द्वारा विश्व कवि रवींद्रनाथ टैगोर की 165वीं जयंती श्रद्धापूर्वक मनाई गई। कार्यक्रम की अध्यक्षता प्रख्यात बाल साहित्यकार हेमंत यादव ने की, जबकि मंच संचालन मनीष राज ने किया। समारोह का आगाज गुरुदेव की तस्वीर पर पुष्पांजलि अर्पित करने और सामूहिक रूप से राष्ट्रगान "जन गण मन" के गायन के साथ हुआ।
2. गुरुदेव: भारतीय सांस्कृतिक चेतना के युगदृष्टा
समारोह को संबोधित करते हुए वक्ताओं ने टैगोर के बहुआयामी व्यक्तित्व पर प्रकाश डाला। परिषद के संस्थापक सचिव विनोद कुमार तिवारी और उपाध्यक्ष प्रमोद कुमार झा ने बताया कि:
- एशिया के प्रथम नोबेल विजेता: गुरुदेव टैगोर 1913 में अपनी कृति 'गीतांजलि' के लिए साहित्य का नोबेल पुरस्कार पाने वाले पहले एशियाई थे।
- अद्वितीय कीर्तिमान: वे दुनिया के एकमात्र ऐसे कवि हैं, जिनकी रचनाएं दो देशों का राष्ट्रगान बनीं—भारत का 'जन गण मन' और बांग्लादेश का 'आमार सोनार बांङ्ला'।
- महात्मा और गुरुदेव: महात्मा गांधी ने उन्हें 'गुरुदेव' की उपाधि दी थी, जबकि टैगोर ने ही गांधी जी को 'महात्मा' कहकर संबोधित किया था।
3. राष्ट्रवाद और शिक्षा का अनूठा संगम: शांति निकेतन
पूर्व प्रधानाध्यापक हरिशंकर झा और हर्ष नारायण दास ने टैगोर के शैक्षिक योगदान की चर्चा करते हुए कहा कि 1901 में उनके द्वारा स्थापित शांति निकेतन (आज का विश्व भारती विश्वविद्यालय) भारतीय शिक्षा पद्धति के लिए एक मिसाल है। टैगोर ने कला, संगीत और प्रकृति को शिक्षा का अभिन्न अंग माना।
4. जलियांवाला बाग के विरोध में लौटाया 'नाइटहुड'
सत्र के दौरान उप सचिव अरविंद ठाकुर ने गुरुदेव के प्रखर राष्ट्रवाद का उल्लेख करते हुए बताया कि 1915 में ब्रिटिश सरकार द्वारा दी गई 'नाइटहुड' की उपाधि को उन्होंने 1919 के जलियांवाला बाग हत्याकांड के विरोध में त्याग दिया था। उन्होंने अपनी कलम से भारतीय स्वतंत्रता संग्राम को नई दिशा और ऊर्जा प्रदान की।
5. गणमान्य उपस्थिति
इस साहित्यिक समागम में शिव नारायण चौधरी, पलक धारी मंडल, सीताराम बिहारी, और अशोक कुमार यादव सहित बड़ी संख्या में साहित्य प्रेमी उपस्थित थे। वक्ताओं ने एक सुर में कहा कि टैगोर के विचार और साहित्य आज भी वैश्विक शांति और मानवता के लिए सबसे बड़े मार्गदर्शक हैं।