नेपाल चुनाव 2026: 'जेन-जी' आंदोलन के बाद क्या बदल जाएगी पड़ोसी देश की सत्ता? नए चेहरों पर टिकी नजरें।

Edited By: Jay Dubey
Updated At: 07 March 2026 14:21:40

नेपाल चुनाव: पुराने दिग्गज बनाम युवा जोश, किसके सिर सजेगा काठमांडू का ताज?

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नेपाल चुनाव: 'जेन-जी' आंदोलन के बाद बदला सियासी मिजाज, क्या नए चेहरे बदलेंगे नेपाल की तकदीर?

काठमांडू/अररिया: पड़ोसी देश नेपाल में बीते 5 मार्च को 275 संसदीय सीटों के लिए मतदान संपन्न हुआ। यह चुनाव सामान्य प्रक्रिया नहीं, बल्कि नेपाल के राजनीतिक इतिहास में एक बड़े बदलाव का संकेत माना जा रहा है। सितंबर 2025 में हुए 'जेन-जी' (Gen-Z) आंदोलन की आग ने न केवल केपी शर्मा ओली की सरकार को सत्ता से बेदखल किया, बल्कि देश की राजनीति में युवाओं और नए चेहरों के लिए रास्ता भी खोल दिया है।

भ्रष्टाचार और बेरोजगारी बने सबसे बड़े मुद्दे इस बार के चुनाव में पुराने राजनीतिक वादों की जगह जमीनी हकीकत ने ले ली है। नेपाल का युवा वर्ग भ्रष्टाचार, बेतहाशा बेरोजगारी और आर्थिक सुस्ती से तंग आ चुका है। यही कारण है कि इस चुनाव में मुख्य मुकाबला केवल पारंपरिक पार्टियों के बीच नहीं, बल्कि पुराने दिग्गजों और नई सोच वाले युवाओं के बीच देखा जा रहा है।

बलेंद्र बालेन शाह: युवाओं की पहली पसंद काठमांडू के मेयर और पूर्व रैपर बलेंद्र बालेन शाह इस समय नेपाल की राजनीति के सबसे बड़े 'पोस्टर बॉय' बनकर उभरे हैं। 'जेन-जी' आंदोलन में उनकी सक्रिय भूमिका और पारदर्शिता के उनके वादों ने उन्हें शहरी मतदाताओं और युवाओं के बीच बेहद लोकप्रिय बना दिया है। कई राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि बालेन शाह इस बार किंगमेकर की भूमिका निभा सकते हैं या प्रधानमंत्री पद की दौड़ में भी शामिल हो सकते हैं।

दिग्गजों की साख दांव पर एक तरफ जहाँ पूर्व प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली अपनी वापसी के लिए संघर्ष कर रहे हैं, वहीं नेपाली कांग्रेस के गगन थापा जैसे नेता रोजगार सृजन और भ्रष्टाचार मिटाने के नाम पर वोट मांग रहे हैं। स्थानीय जानकारों के अनुसार, भारत के साथ मधुर संबंधों को बनाए रखने के लिए सीमावर्ती इलाकों के लोग नेपाली कांग्रेस को एक भरोसेमंद विकल्प मान रहे हैं।

कड़ी सुरक्षा के बीच हुआ मतदान चुनाव के मद्देनजर भारत-नेपाल सीमा पर सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए थे। अररिया के जोगबनी और आसपास के इलाकों में 72 घंटे पहले ही सीमा सील कर दी गई थी और एसएसबी (SSB) के जवान मुस्तैद रहे। विराटनगर जैसे क्षेत्रों में मतदान शांतिपूर्ण रहा, हालांकि सरलाही से छिटपुट झड़पों की खबरें भी सामने आईं।

क्या होगा परिणाम? पूर्व मुख्य न्यायाधीश सुशीला कार्की की अंतरिम सरकार की देखरेख में हुए इन चुनावों की मतगणना शुरू हो चुकी है। अब पूरी दुनिया की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि क्या नेपाल की जनता पुराने अनुभवी चेहरों पर दोबारा भरोसा करेगी या फिर 'जेन-जी' आंदोलन से निकले नए और सुधारवादी नेतृत्व को देश की कमान सौंपेगी।

ब्यूरो रिपोर्ट, टाइम्स भारत न्यूज़

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