सुलतान पोखर में गूंजा नारा: 'पेड़ है सांसें, पेड़ है जीवन'—शशि एकेडमी में हरियाली मिशन का शंखनाद

Edited By: Hemant yadav
Updated At: 21 March 2026 20:12:44

पर्यावरण प्रदूषण बना जीवन के लिए अभिशाप: अररिया में साहित्यकार हेमंत यादव ने बच्चों को दी चेतावनी

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विशेष रिपोर्ट: सुलगती धरती और सिसकती सांसें—क्या हम आने वाली पीढ़ी को सिर्फ प्रदूषण का 'अभिशाप' देंगे? 

Hemant yadav

संवाददाता: टाइम्स भारत न्यूज़ डेस्क स्थान: सुल्तान पोखर, अररिया तारीख: 21 मार्च, 2026

प्रस्तावना: खतरे की घंटी और हमारी जिम्मेदारी

"वृक्ष धरा के भूषण हैं, करते दूर प्रदूषण हैं।" यह महज एक नारा नहीं, बल्कि आज के समय की सबसे बड़ी जरूरत है। जिस रफ्तार से कंक्रीट के जंगल बढ़ रहे हैं और असली जंगल घट रहे हैं, उसने मानवता को विनाश के कगार पर खड़ा कर दिया है। इसी गंभीर विषय पर जन-जागरूकता फैलाने के उद्देश्य से स्थानीय सुल्तान पोखर स्थित शशि एकेडमी में एक गौरवशाली कार्यक्रम का आयोजन किया गया। पंडित रामदेनी तिवारी द्विजदेनी क्लब द्वारा संचालित 'हरियाली मिशन' के तहत आयोजित इस कार्यक्रम ने बच्चों और समाज को पर्यावरण संरक्षण का पाठ पढ़ाया।

1. स्वस्थ समाज के लिए स्वस्थ वातावरण अनिवार्य: हेमंत यादव

कार्यक्रम के मुख्य वक्ता और सुप्रसिद्ध वरिष्ठ बाल साहित्यकार हेमंत यादव ने स्कूली बच्चों को संबोधित करते हुए एक मर्मस्पर्शी भाषण दिया। उन्होंने कहा कि मानव ने विकास की अंधी दौड़ में प्रकृति की व्यवस्था को छिन्न-भिन्न कर दिया है।

हेमंत यादव के संबोधन के मुख्य बिंदु:

  • अव्यवस्थित प्रकृति: प्राकृतिक चक्र के साथ की गई छेड़छाड़ का नतीजा आज बेमौसम बारिश, भीषण गर्मी और नई-नई बीमारियों के रूप में सामने आ रहा है।
  • प्रदूषण के विविध रूप: केवल धुआं ही प्रदूषण नहीं है। उन्होंने प्रकाश प्रदूषण (Light Pollution), ध्वनि प्रदूषण (Noise Pollution) और वनों के विनाश से होने वाले प्रदूषण को जीवन के लिए एक 'अभिशाप' बताया।
  • अस्तित्व पर खतरा: यदि आज हम नहीं चेते, तो केवल मनुष्य ही नहीं, बल्कि धरती पर मौजूद तमाम जीव-जंतुओं का अस्तित्व समाप्त हो जाएगा।

2. 'पेड़ हैं सांसें, पेड़ है जीवन': बिनोद कुमार तिवारी का संदेश

पर्यावरण संरक्षक बिनोद कुमार तिवारी ने कार्यक्रम में भावुक और ओजस्वी अपील की। उन्होंने स्पष्ट किया कि पर्यावरण विनाश की सबसे पहली और सबसे घातक मार हमारे बच्चों पर पड़ती है। प्रदूषित हवा और दूषित जल बच्चों के शारीरिक और मानसिक विकास को अवरुद्ध कर रहे हैं।

उन्होंने अपनी कविता 'पेड़ है सांसें, पेड़ है जीवन' के माध्यम से बच्चों के कोमल मन में प्रकृति के प्रति प्रेम जगाया। इसके बाद पूरा विद्यालय परिसर नारों से गूंज उठा:

"वन धरती के आभूषण हैं, पौधे लगाएं, जीवन बचाएं।" > "वृक्ष देते हैं हमें वरदान—रोटी, कपड़ा और मकान।" > "हरियाली है जहां, खुशहाली है वहां।"

इन नारों ने बच्चों में एक नया संकल्प फूँका कि वे न केवल स्वयं पौधे लगाएंगे, बल्कि समाज को भी इसके लिए प्रेरित करेंगे।

3. पर्यावरण प्रदूषण: एक वैश्विक समस्या और स्थानीय समाधान

टाइम्स भारत न्यूज़ के इस विशेष विश्लेषण में हम यह बताना चाहते हैं कि अररिया जैसे जिलों में भी अब पर्यावरण का संतुलन बिगड़ने लगा है। बढ़ती गाड़ियाँ, जल स्रोतों का सूखना और पेड़ों की अंधाधुंध कटाई स्थानीय स्तर पर तापमान बढ़ा रही है।

प्रदूषण के प्रकार और उनका प्रभाव:

  1. वायु प्रदूषण: जहरीली हवा फेफड़ों के रोगों का कारण बन रही है।
  2. जल प्रदूषण: सुल्तान पोखर जैसे ऐतिहासिक जल स्रोतों का संरक्षण अनिवार्य है, अन्यथा भविष्य में जल संकट गहरा जाएगा।
  3. ध्वनि प्रदूषण: आधुनिक शोर-शराबा मानसिक तनाव और सुनने की शक्ति को प्रभावित कर रहा है।

4. स्कूल और शिक्षा का योगदान

शशि एकेडमी के निदेशक सिंपल कुमार और प्रिंसिपल रश्मिरेखा सिन्हा ने क्लब के इस प्रयास की सराहना की। शिक्षक सुमन शेखर ने कहा कि किताबी ज्ञान के साथ-साथ बच्चों को व्यावहारिक रूप से पर्यावरण से जोड़ना ही सच्ची शिक्षा है। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में मौजूद बच्चों ने शपथ ली कि वे अपने जन्मदिन पर कम से कम एक पौधा जरूर लगाएंगे।

5. निष्कर्ष: अब नहीं तो कब?

पंडित रामदेनी तिवारी द्विजदेनी क्लब का 'हरियाली मिशन' समाज के लिए एक प्रेरणा है। लेकिन यह जिम्मेदारी सिर्फ एक क्लब या स्कूल की नहीं है। यह जिम्मेदारी हर उस नागरिक की है जो इस धरती पर सांस ले रहा है।

टाइम्स भारत न्यूज़ की अपील: पेड़ सिर्फ लकड़ी का ढेर नहीं हैं, वे ऑक्सीजन के कारखाने हैं। यदि हम चाहते हैं कि हमारे बच्चे एक स्वस्थ वातावरण में सांस लें, तो हमें 'हरियाली मिशन' को अपने घर-घर तक ले जाना होगा। पेड़ों को बचाना, पानी का सदुपयोग करना और प्लास्टिक का त्याग करना ही आज की सबसे बड़ी देशभक्ति है।

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