अररिया में 'रेणु महोत्सव 2026' का भव्य आगाज़: साहित्यकारों और कवियों ने दी फणीश्वर नाथ रेणु को स्वरांजलि।

Edited By: Hemant yadav
Updated At: 19 March 2026 21:02:07

टाउन हॉल अररिया में गूँजी रेणु की यादें: दिनेश बावरा और डॉ. तिष्याश्री के काव्य पाठ ने बांधा समां।

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अररिया के टाउन हॉल में 'रेणु महोत्सव 2026' का भव्य आयोजन: साहित्य और संस्कृति के संगम से जीवंत हुई फणीश्वर नाथ रेणु की स्मृतियाँ

अररिया (टाइम्स भारत ब्यूरो):

 

Hemant yadav

 बिहार की उर्वर माटी और आंचलिक कथा साहित्य के पुरोधा फणीश्वर नाथ रेणु की विरासत को सहेजने और उसे नई पीढ़ी तक पहुँचाने के उद्देश्य से, जिला प्रशासन अररिया एवं कला, संस्कृति एवं युवा विभाग, बिहार के संयुक्त तत्वावधान में 'रेणु महोत्सव 2026' का गरिमामयी आयोजन किया गया। जिला मुख्यालय स्थित टाउन हॉल में आयोजित इस कार्यक्रम ने न केवल साहित्य प्रेमियों को मंत्रमुग्ध किया, बल्कि अररिया की सांस्कृतिक चेतना को भी नया विस्तार दिया।

दीप प्रज्ज्वलन के साथ सांस्कृतिक अनुष्ठान का आगाज़

कार्यक्रम का विधिवत शुभारंभ मुख्य अतिथियों और जिला प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारियों द्वारा संयुक्त रूप से दीप प्रज्ज्वलित कर किया गया। दीप की लौ के साथ ही पूरा टाउन हॉल 'मैला आँचल' के रचनाकार की यादों से महक उठा। समारोह में जिला प्रशासन के आला अधिकारी, साहित्यकार, और कलाप्रेमी भारी संख्या में मौजूद रहे। इस अवसर पर फणीश्वर नाथ रेणु के सुपुत्र श्री दक्षिणेश्वर राय पप्पू की विशेष उपस्थिति ने कार्यक्रम को और भी भावुक और ऐतिहासिक बना दिया।

साहित्य परिचर्चा: रेणु के साहित्य पर मंथन

महोत्सव का मुख्य आकर्षण 'रेणु साहित्य' पर आधारित विशेष परिचर्चा रही। इसमें जिले के एक दर्जन से अधिक प्रख्यात साहित्यकारों ने हिस्सा लिया। परिचर्चा के दौरान वक्ताओं ने रेणु जी की लेखनी में छिपे ग्राम्य जीवन के दर्द, उल्लास और उनकी बेबाक आंचलिकता पर प्रकाश डाला।

प्रमुख वक्ताओं के विचार:

  • भोला पंडित प्रणयी और मांगन मिश्र मार्तंड ने रेणु जी के व्यक्तिगत जीवन से जुड़े अनछुए पहलुओं को साझा किया।
  • सदानंद सुमन और अजय अकेला ने बताया कि कैसे रेणु का साहित्य आज के दौर में भी प्रासंगिक है।
  • रहबान अली राकेश, रफी हैदर अंजुम, शंकर ठाकुर तथा हेमंत यादव ने रेणु की कहानियों के पात्रों—सिरचन से लेकर होरी तक की जीवंतता पर अपने विचार रखे।

साहित्यकारों का मानना था कि रेणु ने केवल शब्द नहीं लिखे, बल्कि उन्होंने मिथिलांचल और सीमांचल की धड़कनों को कागज़ पर उकेरा है।

कवि सम्मेलन: तालियों की गड़गड़ाहट से गूँजा टाउन हॉल

साहित्यिक परिचर्चा के बाद आयोजित 'कवि सम्मेलन' ने कार्यक्रम में चार चाँद लगा दिए। देश के विभिन्न हिस्सों से आए कवियों ने अपनी रचनाओं से श्रोताओं को झूमने पर मजबूर कर दिया।

  1. दिनेश बावरा (गोरखपुर): मशहूर हास्य कवि दिनेश बावरा ने अपनी चिर-परिचित शैली में व्यंग्य और हास्य की ऐसी फुलझड़ियाँ छोड़ीं कि पूरा हॉल ठहाकों से गूँज उठा। उन्होंने समसामयिक विषयों पर कटाक्ष करते हुए लोगों को लोटपोट कर दिया।
  2. डॉ. तिष्याश्री (दरभंगा): प्रख्यात कवयित्री डॉ. तिष्याश्री ने अपनी ओजस्वी और मधुर आवाज़ में प्रेम एवं संवेदनाओं की कविताएँ पढ़ीं। उनकी पंक्तियों ने महिलाओं और समाज के गहरे रिश्तों को बखूबी बयां किया।
  3. अमरदीप कुमार (मुजफ्फरपुर): युवा कवि अमरदीप कुमार ने अपनी कविताओं के माध्यम से युवा जोश और सामाजिक सरोकारों को स्वर दिया। उनकी कविताओं में भविष्य के प्रति एक नई उम्मीद और चेतना दिखाई दी।

सम्मान और गरिमा

कार्यक्रम के समापन सत्र में जिला प्रशासन द्वारा कला और साहित्य के क्षेत्र में अमूल्य योगदान देने वाले अतिथियों को सम्मानित किया गया। परिचर्चा में शामिल सभी साहित्यकारों, आमंत्रित कवियों और सफल मंच संचालन के लिए नरसिंह मंडल को अंग वस्त्र, स्मृति चिह्न (मोमेंटो) और डायरी प्रदान कर सम्मानित किया गया।

इस आयोजन के मुख्य सूत्रधार और कार्यक्रम के संयोजक सान्याल कुमार (जिला कला एवं संस्कृति पदाधिकारी) ने जिला प्रशासन की ओर से सभी के प्रति आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि रेणु महोत्सव केवल एक आयोजन नहीं, बल्कि अररिया की साहित्यिक अस्मिता का प्रतीक है।

प्रशासनिक सक्रियता और सफल संचालन

पूरे कार्यक्रम के दौरान जिला प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारियों की सक्रियता सराहनीय रही। सुरक्षा व्यवस्था से लेकर आगंतुकों के सत्कार तक, हर पहलू पर बारीक नज़र रखी गई। मंच का कुशल और सफल संचालन नरसिंह मंडल ने किया, जिन्होंने अपनी वाक्पटुता और शायरी से कार्यक्रम की निरंतरता और उत्साह को अंत तक बनाए रखा।

निष्कर्ष

'रेणु महोत्सव 2026' ने एक बार फिर यह साबित कर दिया कि फणीश्वर नाथ रेणु के शब्द आज भी लोगों के दिलों में जीवित हैं। इस तरह के आयोजनों से न केवल स्थानीय प्रतिभाओं को मंच मिलता है, बल्कि क्षेत्रीय संस्कृति और भाषा का संरक्षण भी होता है। अररिया की जनता और साहित्यकारों ने इस सफल आयोजन के लिए जिला प्रशासन और बिहार सरकार की भूरि-भूरि प्रशंसा की है।

रिपोर्ट: टाइम्स भारत डेस्क, अररिया

 

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