खर्मास में शुभ कार्य क्यों नहीं किए जाते?
खर्मास के दौरान विवाह और बड़े संस्कार नहीं किए जाते !
खर्मास में शुभ कार्य क्यों नहीं किए जाते? —
खर्मास हिंदू पंचांग के अनुसार वह अवधि होती है जब सूर्य देव धनु या मीन राशि में प्रवेश करते हैं। यह समय आमतौर पर वर्ष में दो बार आता है—एक बार दिसंबर–जनवरी में और दूसरी बार मार्च–अप्रैल में। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार खर्मास को शुभ कार्यों के लिए वर्जित माना जाता है।
धार्मिक ग्रंथों के अनुसार इस अवधि में सूर्य देव की गति मंद हो जाती है, जिससे इसे अशुभ काल माना गया है। माना जाता है कि सूर्य की ऊर्जा कम होने से विवाह, गृह प्रवेश, मुंडन, नई खरीदारी (जैसे जमीन, घर, वाहन) जैसे मांगलिक कार्यों में सकारात्मक फल नहीं मिलता।
खर्मास के दौरान विवाह और बड़े संस्कार इसलिए नहीं किए जाते क्योंकि इसे देवताओं के विश्राम का समय माना गया है। ऐसी धारणा है कि इस काल में किए गए कार्यों में बाधाएं आती हैं और इच्छित फल की प्राप्ति नहीं होती।
हालांकि, खर्मास के समय धार्मिक कार्यों को विशेष महत्व दिया गया है। इस दौरान दान-पुण्य, जप-तप, व्रत, कथा-पाठ और भगवान की भक्ति करना अत्यंत शुभ माना जाता है। गरीबों को अन्न, वस्त्र और दक्षिणा देने से पुण्य की प्राप्ति होती है।
निष्कर्षतः, खर्मास में शुभ कार्य और खरीदारी इसलिए नहीं की जाती क्योंकि यह समय आध्यात्मिक साधना और आत्मचिंतन के लिए उपयुक्त माना गया है। यह अवधि मनुष्य को सांसारिक कार्यों से हटकर धर्म और सेवा की ओर प्रेरित करती है।