भारत–EU FTA: आर्थिक कूटनीति का नया अध्याय
आर्थिक हैसियत को नई मजबूती देगा।भारत की वैश्विक
भारत और 27 देशों वाले यूरोपीय संघ के बीच प्रस्तावित फ्री ट्रेड एग्रीमेंट केवल व्यापारिक समझौता नहीं, बल्कि आर्थिक कूटनीति का अहम कदम है। यूरोपीय कल्चर पारदर्शिता, श्रम अधिकार और पर्यावरणीय मानकों पर आधारित है, जो इस समझौते को और अधिक व्यापक बनाता है।
यह FTA भारतीय उद्योगों को यूरोप के उच्च-स्तरीय बाजारों तक पहुंच देगा, वहीं भारत में निवेश और रोजगार के नए अवसर पैदा करेगा। चुनौती यह है कि भारत को अपने घरेलू उद्योगों की सुरक्षा करते हुए वैश्विक मानकों के साथ तालमेल बैठाना होगा। यदि संतुलन बना रहा, तोभारत–यूरोपीय संघ (27 देश) फ्री ट्रेड एग्रीमेंट: नए आर्थिक युग की ओर कदम
भारत और यूरोपीय संघ (EU) के बीच प्रस्तावित फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (FTA) को वैश्विक व्यापार के लिहाज से एक महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है। यूरोपीय संघ 27 देशों का एक संगठित समूह है, जिसकी आर्थिक, सांस्कृतिक और नीतिगत संरचना को अक्सर “यूरोपीय कल्चर” के रूप में देखा जाता है। इस ढांचे के तहत पारदर्शिता, श्रम अधिकार, पर्यावरण संरक्षण और उच्च गुणवत्ता मानकों पर विशेष जोर दिया जाता है।
इस समझौते का उद्देश्य भारत और यूरोपीय देशों के बीच व्यापारिक बाधाओं को कम करना, आयात–निर्यात को आसान बनाना और निवेश के नए अवसर खोलना है। यदि यह FTA लागू होता है, तो भारतीय टेक्सटाइल, फार्मा, आईटी सेवाओं, ऑटोमोबाइल और कृषि उत्पादों को यूरोपीय बाजारों में बेहतर पहुंच मिल सकती है। वहीं, यूरोपीय कंपनियों को भारत के विशाल उपभोक्ता बाजार और मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में निवेश के नए रास्ते खुलेंगे।
यूरोपीय कल्चर के तहत यह समझौता केवल व्यापार तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि टिकाऊ विकास, ग्रीन एनर्जी, डिजिटल ट्रांजिशन और स्किल डेवलपमेंट जैसे क्षेत्रों में भी सहयोग को बढ़ावा देगा। भारत के लिए यह समझौता वैश्विक सप्लाई चेन में अपनी भूमिका मजबूत करने और ‘मेक इन इंडिया’ को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर विस्तार देने का अवसर बन सकता है।
कुल मिलाकर, भारत–EU फ्री ट्रेड एग्रीमेंट दोनों पक्षों के लिए दीर्घकालिक आर्थिक साझेदारी की नींव रख सकता है और भारत को विकसित अर्थव्यवस्थाओं के साथ और मजबूती से जोड़ने में सहायक सिद्ध हो सकता है। यह समझौता आर्थिक हैसियत को नई मजबूती देगा।भारत की वैश्विक