सत्तू दुकानदार ने काटा पिकअप ड्राइवर का गला, हाथ में सिर लेकर घूमता रहा कातिल—दहशत में फारबिसगंज।

Edited By: adv rahul ranjan
Updated At: 10 April 2026 08:38:14

ग्राउंड रिपोर्ट: फारबिसगंज बाजार समिति में खूनी खेल, दो मौतों के बाद सड़क जाम, प्रशासन के हाथ-पांव फूले।

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सनसनीखेज: फारबिसगंज में खूनी तांडव! मामूली विवाद में ड्राइवर का सिर काटा, फिर भीड़ ने आरोपी को पीट-पीटकर मार डाला

 

संवाददाता: टाइम्स भारत न्यूज़ डेस्क स्थान: फारबिसगंज (अररिया) तारीख: 10 अप्रैल, 2026

 मामूली विवाद और खौफनाक अंजाम

अररिया जिले के फारबिसगंज थाना क्षेत्र में गुरुवार की सुबह एक ऐसी वारदात हुई जिसने इंसानियत को शर्मसार कर दिया। कृषि उत्पादन बाजार समिति के गेट संख्या दो के पास महज 'गाड़ी हटाने' और 'ठेला लगाने' को लेकर हुई बहस ने दो परिवारों को उजाड़ दिया। यह विवाद इतना बढ़ा कि सत्तू बेचने वाले एक दुकानदार ने पिकअप ड्राइवर की गर्दन धड़ से अलग कर दी।

 गर्दन काटकर हाथ में लेकर टहलता रहा कातिल

मृतक ड्राइवर की पहचान जोगबनी नगर परिषद क्षेत्र के अमौना (वार्ड संख्या 21) निवासी नबी हुसैन के रूप में हुई है। चश्मदीदों के मुताबिक, रवि चौहान नामक ठेला दुकानदार ने पहले नबी हुसैन के पेट में चाकू घोंपा और फिर बेरहमी से उसका सिर काट दिया। प्रत्यक्षदर्शियों का कहना है कि हत्या के बाद रवि चौहान ड्राइवर का कटा हुआ सिर हाथ में लेकर कुछ देर तक घूमता रहा, जिससे पूरे इलाके में अफरातफरी और दहशत का माहौल बन गया।

 

वारदात को अंजाम देने के बाद आरोपी रवि चौहान पास की झाड़ियों में छिप गया था। भीड़  ने  उसे खोज निकाला, लेकिन  आक्रोशित भीड़ ने कानून अपने हाथ में ले लिया।

 

 इलाके में तनाव, पुलिस प्रशासन के खिलाफ आक्रोश

इस दोहरे हत्याकांड के बाद कृषि उत्पादन बाजार समिति, सुभाष चौक और आसपास के इलाकों में भारी तनाव व्याप्त है। गुस्साए लोगों ने सड़क जाम कर पुलिस प्रशासन और अवैध ऑटो स्टैंड के खिलाफ जोरदार प्रदर्शन किया।

  • देरी से पहुँचने का आरोप: स्थानीय लोगों का आरोप है कि घटना की सूचना देने के बावजूद पुलिस काफी देर से पहुँची, जिसके कारण स्थिति अनियंत्रित हो गई।
  • बड़े अफसरों का जमावड़ा: स्थिति की गंभीरता को देखते हुए एसडीएम अभय कुमार तिवारी, एसडीपीओ मुकेश कुमार साहा और थानाध्यक्ष मनोज कुमार भारी पुलिस बल के साथ मौके पर तैनात हैं

टाइम्स भारत न्यूज़ विश्लेषण: क्या कानून का डर खत्म हो गया है?

आज की यह घटना दो बड़े सवाल खड़े करती है। पहला— मामूली विवाद पर किसी का गला काट देना किस मानसिक विक्षिप्तता का प्रमाण है? और दूसरा—  फारबिसगंज की शांति आज लहूलुहान है।

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