नेताजी सुभाष चंद्र बोस जयंती: स्वाभिमान, साहस और संकल्प का प्रतीक

Edited By: Jay Dubey
Updated At: 04 February 2026 22:39:21

तुम मुझे खून दो, मैं तुम्हें आज़ादी दूंगा”

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नेताजी सुभाष चंद्र बोस जयंती: स्वाभिमान, साहस और संकल्प का प्रतीक

आज नेताजी सुभाष चंद्र बोस की जयंती पर राष्ट्र उस महानायक को नमन करता है, जिसने आज़ादी की लड़ाई को निर्भीकता, अनुशासन और आत्मसम्मान का स्वर दिया। नेताजी केवल एक क्रांतिकारी नेता नहीं थे, बल्कि वे ऐसे विचारक थे जिन्होंने पराधीनता की जंजीरों को तोड़ने के लिए निर्णायक संघर्ष का आह्वान किया।

उनका प्रसिद्ध उद्घोष—“तुम मुझे खून दो, मैं तुम्हें आज़ादी दूंगा”—भारतीय युवाओं के भीतर सोए साहस को जगाने वाला मंत्र बना। आज़ाद हिंद फौज के गठन और उसके संचालन में नेताजी ने यह स्पष्ट किया कि स्वतंत्रता केवल याचना से नहीं, बल्कि संगठित प्रयास और त्याग से प्राप्त होती है। उनका जीवन हमें यह सिखाता है कि राष्ट्रहित सर्वोपरि है और उसके लिए निजी सुविधाओं का त्याग भी आवश्यक है।

आज के समय में, जब देश अनेक चुनौतियों और अवसरों के दौर से गुजर रहा है, नेताजी के विचार और भी प्रासंगिक हो जाते हैं। आत्मनिर्भरता, राष्ट्रीय एकता और अनुशासन—ये मूल्य आज भी हमारी दिशा तय कर सकते हैं। नेताजी की जयंती हमें केवल अतीत को स्मरण करने का अवसर नहीं देती, बल्कि भविष्य के प्रति जिम्मेदारी का बोध कराती है।

नेताजी सुभाष चंद्र बोस का जीवन संदेश देता है कि दृढ़ संकल्प और निडर नेतृत्व से असंभव भी संभव बन सकता है। उनके आदर्शों को आत्मसात कर ही हम सच्चे अर्थों में उनके प्रति श्रद्धांजलि अर्पित कर सकते हैं।

 

 

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